Petrol-Diesel Price 2026: देश में इस समय चुनावी माहौल चल रहा है और इसी बीच आम आदमी की जेब पर भरी जोर पड़ रहा है क्योंकि पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और अन्य राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजे आते ही पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 25 से 28 रुपये प्रति लीटर तक की भारी बढ़ोतरी की जा सकती है ।
ईरान युद्ध और वैश्विक तेल संकट (Global Oil Crisis) के साये में चल रही इन खबरों पर अब खुद भारत सरकार ने आधिकारिक बयान जारी कर स्थिति साफ कर दी है। आइए जानते हैं कि क्या वाकई आपकी गाड़ी का ईंधन महंगा होने वाला है या यह महज एक अफवाह है।
सरकार का बयान
जैसे ही बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी उछाल की खबरें आईं, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (Ministry of Petroleum and Natural Gas) ने तुरंत इसका खंडन किया। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि सरकार के पास फिलहाल ईंधन की कीमतें बढ़ाने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
- भ्रामक खबरें: सरकार ने इन रिपोर्ट्स को ‘शरारतपूर्ण’ और ‘भ्रामक’ करार दिया है मंत्रालय का कहना है कि ऐसी खबरें केवल जनता के बीच डर और घबराहट पैदा करने के लिए फैलाई जा रही हैं।
- 4 साल का रिकॉर्ड: सरकार ने यह भी याद दिलाया कि भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल है, जहां पिछले 4 वर्षों में अंतरराष्ट्रीय उथल-पुथल के बावजूद पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर रखा गया है।
आखिर क्यों उठी पेट्रोल-डीजल में ‘आग’ लगने की बात?
कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका के पीछे दो मुख्य कारण बताए जा रहे थे:
1. विधानसभा चुनाव 2026 – Assembly Elections
कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज जैसी कुछ ब्रोकरेज फर्मों की रिपोर्ट्स में यह अंदेशा जताया गया था कि चुनाव खत्म होते ही (अंतिम चरण का मतदान 29 अप्रैल को है) तेल कंपनियां अपने घाटे की भरपाई के लिए कीमतें बढ़ा सकती हैं। अक्सर यह देखा गया है कि चुनावों के दौरान कीमतें स्थिर रहती हैं और बाद में उनमें बदलाव होता है।
2. ईरान युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी
ईरान युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल ‘होर्मुज स्ट्रेट’ (Strait of Hormuz) से होकर गुजरता है, जो फिलहाल युद्ध के कारण बाधित है।
- अब तक करीब 600 मिलियन बैरल तेल की सप्लाई रुक चुकी है।
- पिछले महीने कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गई थी।
- वर्तमान में कच्चा तेल 103 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रहा है।
भारत पर असर: बढ़ता आयात बिल
भले ही सरकार ने कीमतें नहीं बढ़ाई हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की तेजी का असर भारत के खजाने पर पड़ रहा है।
- खर्च में बढ़ोतरी: तेल आयात में 13-15% की गिरावट के बावजूद, भारत का दैनिक क्रूड इम्पोर्ट बिल 190 से 210 मिलियन डॉलर तक बढ़ गया है।
- छूट का खत्म होना: रूस और ईरान से मिलने वाले सस्ते तेल पर जो डिस्काउंट मिल रहा था, वह भी अब लगभग खत्म हो गया है, जिससे सरकारी तेल कंपनियों पर बोझ बढ़ रहा है।
Petrol-Diesel Rates Today – दिल्ली में आज क्या हैं रेट्स?
फिलहाल दिल्ली सहित अन्य महानगरों में कीमतें स्थिर बनी हुई हैं:
- पेट्रोल (दिल्ली): ₹94.77 प्रति लीटर
- डीजल (दिल्ली): ₹87.62 प्रति लीटर
निष्कर्ष: सरकार के ताजा बयान से साफ है कि फिलहाल ₹25-28 की बढ़ोतरी जैसी कोई योजना नहीं है हालांकि, ईरान युद्ध की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों पर लंबे समय तक नियंत्रण रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। फिलहाल आम जनता के लिए राहत की बात यही है कि सरकार ने कीमतों में बढ़ोतरी के प्रस्ताव को पूरी तरह नकार दिया है।

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