मिडिल-ईस्ट में जारी युद्ध को रुके 35 दिन हो चुके हैं। हर दिन नए हमले, हर दिन नई तबाही। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच यह जंग अब सिर्फ सैन्य संघर्ष नहीं रह गई है, बल्कि यह एक डिप्लोमैटिक युद्ध में बदल चुकी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बार-बार सीजफायर के दावे कर रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि हर दिन नए हमले हो रहे हैं। ऐसे में ईरान के पूर्व विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद जरीफ ने एक ऐसा सुझाव दिया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति के गलियारों में हलचल मचा दी है।
जरीफ ने ईरानी शासन को सलाह दी है कि वह खुद को विजेता घोषित कर युद्ध रोक दे। यह सलाह सुनने में भले ही साधारण लगे, लेकिन इसके पीछे की रणनीति इतनी गहरी है कि इससे पूरे मिडिल-ईस्ट का समीकरण बदल सकता है।
क्यों आई यह सलाह, समझिए पूरा गणित
जब दो ताकतवर पक्ष आमने-सामने हों और कोई पीछे हटने को तैयार न हो, तो युद्ध लंबा खिंचता है। यही हो रहा है। ईरान ने अब तक इजरायल और खाड़ी देशों पर कई हमले किए हैं। वहीं अमेरिका ने ईरान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। ट्रंप ने कई बार कहा कि वह इस युद्ध को रोकेंगे, लेकिन हर बार कोई न कोई घटना सब कुछ उलट देती है।
जरीफ का मानना है कि अब युद्ध को रोकने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि ईरान खुद पहल करे। वह कहते हैं कि ईरान को खुद को विजेता घोषित करना चाहिए। ऐसा करने से ईरान के भीतर जनता के बीच संदेश जाएगा कि उनकी सेना ने अमेरिका और इजरायल जैसी ताकतों का सामना किया और विजयी हुई। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान की छवि एक जिम्मेदार ताकत के रूप में बनेगी जिसने खुद से युद्ध रोकने की पहल की।
ट्रंप को उन्हीं की भाषा में जवाब
यह सलाह सिर्फ युद्ध रोकने तक सीमित नहीं है। इसके पीछे एक बड़ा डिप्लोमैटिक गेम है। ट्रंप ने बार-बार मीडिया में दावा किया है कि वह इस युद्ध को रोकने वाले हैं। लेकिन अगर ईरान खुद से युद्ध रोकता है, तो ट्रंप का वह दावा झूठा साबित हो जाएगा। दुनिया देखेगी कि युद्ध रोकने का श्रेय ट्रंप को नहीं, बल्कि ईरान को जाता है।
जरीफ ने अपने X पोस्ट में साफ लिखा है कि वह ट्रंप की लापरवाह आक्रामकता और अपमानजनक बातों से नाराज हैं। उनका यह सुझाव ईरान को एक ऐसा हथियार दे सकता है जो किसी मिसाइल से कम नहीं है। यह ट्रंप को उन्हीं की भाषा में जवाब देने जैसा है।
अमेरिकी लेख में छिपा है राज
जरीफ का यह बयान अमेरिका की प्रतिष्ठित पत्रिका फॉरेन अफेयर्स में छपे एक लेख का हिस्सा है। इसमें उन्होंने विस्तार से बताया है कि कैसे ईरान इस रणनीति से न सिर्फ युद्ध रोक सकता है, बल्कि पूरे क्षेत्र में स्थिरता भी ला सकता है। उन्होंने लिखा है कि वह इस शांति योजना को प्रकाशित करने को लेकर दुविधा में थे, लेकिन उन्हें यकीन है कि युद्ध का अंत ईरान के हितों के अनुरूप ही होना चाहिए।
गौर करने वाली बात यह है कि जरीफ वही शख्स हैं जिन्होंने सालों तक ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका और दूसरे देशों के साथ बातचीत में ईरान का नेतृत्व किया।
क्या ईरान मानेगा जरीफ की बात
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ईरानी शासन अपने पूर्व विदेश मंत्री की इस सलाह को मानेगा। फिलहाल तो ईरानी सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान भी इस लंबे युद्ध से थक चुका है। देश की अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव है। अमेरिकी प्रतिबंध पहले से ही ईरान को कमजोर कर चुके हैं। ऐसे में लंबा युद्ध ईरान के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।
युद्ध का हाल: 35 दिन, 35 तबाहियां
35 दिनों के इस युद्ध में अब तक सैकड़ों लोग मारे जा चुके हैं। इजरायल के कई शहर तबाह हो गए हैं। ईरान के भी बड़े नुकसान हुए हैं। अमेरिका ने अपने कई सैन्य अड्डे खो दिए हैं। पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतें आसमान छू रही हैं। दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाएं इस युद्ध की मार झेल रही हैं।
ऐसे हालात में कोई भी पक्ष अब चाहता है कि यह युद्ध जल्द से जल्द खत्म हो। लेकिन सवाल यह है कि कौन पहले पीछे हटे। अगर कोई पीछे हटता है तो दुनिया उसे कमजोर समझेगी। यहीं पर जरीफ की सलाह काम आती है। वह कहते हैं कि पीछे हटना कमजोरी नहीं, बल्कि रणनीति हो सकती है।
आम आदमी पर क्या असर, कब मिलेगी राहत
अगर ईरान जरीफ की सलाह मानता है और युद्ध रुकता है, तो इसका सबसे बड़ा फायदा आम आदमी को होगा। दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल की कीमतें गिरेंगी। भारत में महंगाई कम होगी। कारोबार पटरी पर आएगा। लेकिन अगर यह युद्ध और लंबा खिंचता है, तो हालात और बिगड़ सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले एक-दो हफ्तों में इस युद्ध को लेकर बड़ा फैसला हो सकता है। हो सकता है कि ईरान खुद को विजेता घोषित करे और सीजफायर का एलान कर दे.

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