Share Market; गुरुवार सुबह 9:15 बजे जब मार्केट खुला तो सबके चेहरे उतरे हुए थे। सेंसेक्स 2 फीसदी से ज्यादा लुढ़क गया। निफ्टी 22,200 के नीचे चला गया। पिछले हफ्ते जिन्होंने निचले स्तर पर खरीदारी की थी, उन्हें लगा कि शायद गलती कर दी।
लेकिन फिर कुछ ऐसा हुआ जिसने सबको हैरान कर दिया। दोपहर बाद अचानक बाजार ने पलटी मारी। सेंसेक्स अपने सबसे निचले स्तर 71,545 से सीधा 73,448 पर पहुंच गया। यानी करीब 1900 अंकों की छलांग। निफ्टी ने 22,759 का स्तर छू लिया।
अब सवाल यह है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि बाजार एकाएक उछल पड़ा। मनीकंट्रोल ने 3 कारण बताए। लेकिन मैंने जब खुद डेटा गहराई से खंगाला, तो 5 और बातें सामने आईं, जो किसी ने नहीं लिखीं।
पहला कारण: आईटी सेक्टर में जबरदस्त वैल्यू बाइंग
पिछले 45 दिनों में निफ्टी IT इंडेक्स 18 फीसदी से ज्यादा गिर चुका था। बड़े-बड़े शेयरों के रेट ऐसे हो गए थे जैसे कंपनी बंद होने वाली हो। एलटीआईमाइंडट्री जैसी कंपनी का शेयर 2000 रुपये के नीचे आ गया था, जबकि इसका 52 हफ्ते का हाई 6000 के करीब है।
ऐसे में जिन्होंने थोड़ा दूर तक सोचा, उन्हें मौका दिखा। उन्होंने खरीदारी शुरू कर दी। LTIMindtree एक दिन में 2 फीसदी से ज्यादा चढ़ गया। कोफोर्ज लगभग 3 फीसदी उछल गया। परसिस्टेंट सिस्टम्स में भी 2 फीसदी की तेजी आई।
लेकिन यहाँ एक बात और है जो किसी ने नहीं लिखी। यह सिर्फ सस्ता होने की वजह से नहीं हुआ। अमेरिका में ब्याज दरों पर संकेत मिलने लगे हैं कि अब और बढ़ोतरी नहीं होगी। इसका सीधा फायदा भारतीय आईटी कंपनियों को होता है क्योंकि उनकी बड़ी कमाई डॉलर में होती है।
दूसरा कारण: रुपये में 12 साल की सबसे बड़ी उछाल
यह कोई आम उछाल नहीं था। रुपया डॉलर के मुकाबले 92.87 के स्तर पर पहुंच गया। यानी एक दिन में लगभग 2 फीसदी की तेजी। पिछली बार इतनी बड़ी छलांग सितंबर 2013 में देखी गई थी।
अब सवाल यह है कि आरबीआई ने ऐसा क्या कर दिया कि रुपया इतना मजबूत हो गया। दरअसल, पिछले कुछ हफ्तों में बहुत सारे विदेशी निवेशक रुपये के कमजोर होने पर सट्टा लगा रहे थे। वे डेरिवेटिव्स के जरिए दांव लगा रहे थे कि रुपया और गिरेगा। आरबीआई ने उनपर शिकंजा कस दिया। बैंकों को विदेशी डेरिवेटिव्स में पोजीशन लेने से रोक दिया गया। इससे सट्टेबाजों को अपनी पोजीशन बंद करनी पड़ी और उन्हें डॉलर खरीदने की बजाय बेचना पड़ा। नतीजा, रुपया चढ़ गया।
एक और दिलचस्प बात। जब रुपया चढ़ रहा था, तब आसपास के सभी देशों की करेंसी कमजोर हो रही थी। पाकिस्तानी रुपया, बांग्लादेशी टका, श्रीलंकाई रुपया सब गिर रहे थे। लेकिन भारतीय रुपया अकेला चमक रहा था। इससे विदेशी निवेशकों का भरोसा भारतीय बाजार पर और मजबूत हुआ।
तीसरा कारण: तकनीकी लेवल से सटीक पलटाव
टेक्निकल एनालिस्ट्स का कहना है कि निफ्टी के लिए 22,220 का स्तर बहुत अहम है। जब तक यह इसके ऊपर रहता है, लॉन्ग पोजीशन बनाई जा सकती है। बाजार ठीक उसी लेवल से पलटा है।
लेकिन इसके अलावा एक और स्तर है 22,800। अगर निफ्टी इसके ऊपर बंद होता है, तो फिर 23,200 तक जाने की संभावना बन जाती है।
मैंने खुद कई चार्ट्स देखे। बैंक निफ्टी का पैटर्न भी कुछ ऐसा ही है। उसने 48,000 के स्तर पर मजबूत सपोर्ट लिया है। अब अगर वह 49,500 के ऊपर जाता है, तो फिर 51,000 तक की राह खुल जाएगी।
चौथा कारण: डॉलर इंडेक्स का गिरना (जो किसी ने नहीं लिखा)
डॉलर इंडेक्स 105 के ऊपर से गिरकर 103.8 पर आ गया है। इसका मतलब है कि दुनिया भर में डॉलर कमजोर हो रहा है। जब डॉलर कमजोर होता है, तो पैसा दूसरे बाजारों में जाता है। भारत उनमें से एक है।
पिछले तीन दिनों में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय बाजार में शुद्ध रूप से 4500 करोड़ रुपये से ज्यादा की खरीदारी की है। ये आंकड़ा अपने आप में बड़ा है। जब FII खरीदारी करते हैं, तो बाजार को ताकत मिलती ही है।
पांचवां कारण: कंपनियों के नतीजों की उम्मीद
यह उछाल सिर्फ एक दिन का नहीं है। दरअसल, मार्च तिमाही के नतीजे अब सामने आने शुरू हो रहे हैं। शुरुआती संकेत बता रहे हैं कि कंपनियों के मुनाफे में गिरावट कम हो गई है।
एफएमसीजी और ऑटो सेक्टर में तो मांग वापस लौटने लगी है। अगर यह ट्रेंड बना रहा, तो अप्रैल-मई में बाजार नए ऊंचाई छू सकता है। बड़ी ब्रोकरेज फर्म्स ने अपनी रिपोर्ट्स में कहा है कि मार्केट का बॉटम पास आ गया है।
लेकिन एक बुरी खबर भी है
इतना सब अच्छा होने के बाद भी यह रिकवरी अभी पूरी तरह से भरोसेमंद नहीं है। क्योंकि सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही अभी भी लाल निशान में बंद हुए हैं। मतलब, जितनी गिरावट आई थी, उसकी पूरी भरपाई नहीं हो पाई। बाजार ने आधी ही वापसी की है।
एक और जोखिम है अमेरिका-ईरान मामला। ट्रंप ने साफ तौर पर नहीं बताया कि ईरान के साथ यह विवाद कब खत्म होगा। जब तक यह अनिश्चितता बनी रहेगी, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहेगा।
अब क्या करना चाहिए
जो पहले से निवेशक हैं, उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। निचले स्तर पर धीरे-धीरे अच्छी कंपनियों में पैसा लगाते रहना चाहिए। जो नए हैं, वे अभी पूरा पैसा एक साथ न लगाएं। सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी एसआईपी का रास्ता बेहतर रहेगा।
मैंने खुद पिछले हफ्ते निफ्टी के 22,400 के स्तर पर कुछ अच्छे आईटी शेयरों में निवेश किया था। आज उनमें 3 से 4 फीसदी का फायदा दिख रहा है। लेकिन मैंने अभी बेचा नहीं है। क्योंकि मुझे लगता है कि आने वाले हफ्तों में और तेजी आ सकती है।
एक और चीज जो मैंने नोटिस की। इस बार मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में ज्यादा खरीदारी नहीं हुई। सारा जोर लार्जकैप पर रहा। मतलब, निवेशक अब भी सेफ स्टॉक्स की तरफ भाग रहे हैं। यह एक संकेत है कि अभी पूरा भरोसा वापस नहीं आया है।
Disclaimer: यह लेख शेयर बाजार में व्यक्तिगत अनुभव, खुद की रिसर्च और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध डेटा के आधार पर लिखा गया है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है। शेयर बाजार में जोखिम होता है। कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले अपने सलाहकार से जरूर मिलें। लेखक या प्रकाशक किसी भी वित्तीय हानि के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे।

मेरा नाम कृष्ण शर्मा है। मैं शिवपुरी जिले (मध्य प्रदेश) का रहने वाला हूं। मैं इस फील्ड में करीब 3 वर्षों से आप लोगों के बीच कार्य करता आ रहा हूं। इससे पहले भी मैंने इस फील्ड में सफलतापूर्वक वेबसाइट्स का संचालन किया है। उसी पुराने अनुभव और विश्वास के साथ मैं दोबारा इस फील्ड में कार्य करने आया हूं। मेरा उद्देश्य केवल आर्टिकल लिखना नहीं, बल्कि अपने विजिटर्स को सही, सटीक तथा जल्द से जल्द जानकारी पहुंचाने का कार्य करना है।