Akshaya Tritiya Kab hai 2026: अक्षय तृतीया पर एक दान से मिलेगा स्वर्ण दान का फल, जानें सही तिथि और शुभ मुहूर्त

Akshaya Tritiya Kab hai 2026: हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया का दिन ‘अबूझ मुहूर्त’ माना जाता है, यानी इस दिन किसी भी शुभ कार्य को करने के लिए पंचांग देखने की आवश्यकता नहीं होती। साल 2026 में अक्षय तृतीया को लेकर कुछ लोगों में तिथि का भ्रम है, क्योंकि तृतीया तिथि दो दिनों तक व्याप्त रह रही है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन किया गया दान और सत्कर्म ‘अक्षय’ होता है, जिसका फल कभी नष्ट नहीं होता।

आइए जानते हैं कि वर्ष 2026 में अक्षय तृतीया किस दिन मनाई जाएगी, खरीदारी का सबसे उत्तम समय क्या है और यदि आप सोना नहीं खरीद सकते, तो किन चीजों को घर लाने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होंगी।

1. Akshaya Tritiya 2026 Date and Time: 19 या 20 अप्रैल, कब है अक्षय तृतीया?

ज्योतिष शास्त्र और पंचांग के अनुसार, अक्षय तृतीया का निर्धारण प्रदोष व्यापिनी तिथि के आधार पर किया जाता है। वर्ष 2026 में तिथियों का समय कुछ इस प्रकार है:

  • तृतीया तिथि का आरंभ: 19 अप्रैल 2026 को सुबह 10:39 बजे।
  • तृतीया तिथि का समापन: 20 अप्रैल 2026 को सुबह 07:41 बजे।

निष्कर्ष: चूंकि 20 अप्रैल को तृतीया तिथि सूर्योदय के बाद केवल कुछ ही समय के लिए है और ‘त्रिमहूर्त व्यापिनी’ नहीं है, इसलिए अक्षय तृतीया का त्योहार 19 अप्रैल 2026, रविवार को ही मनाया जाएगा। खरीदारी, दान-पुण्य और अबूझ मुहूर्त के सभी कार्य इसी दिन किए जाएंगे।

2. Akshaya Tritiya Shubh Muhurat for Gold Purchase: खरीदारी का श्रेष्ठ समय

अक्षय तृतीया पर सोना या चांदी खरीदना सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। यदि आप निवेश या आभूषण खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो 19 अप्रैल को निम्नलिखित समय सबसे शुभ रहेगा:

  • प्रात: काल का मुहूर्त: सुबह 10:41 बजे से दोपहर 12:05 बजे तक।
  • सायंकाल का मुहूर्त: 19 तारीख की पूरी रात खरीदारी के लिए शुभ है क्योंकि तिथि पूरी रात उपलब्ध रहेगी।
  • 20 अप्रैल का विकल्प: यदि आप 20 अप्रैल को कुछ खरीदना चाहते हैं, तो सुबह 07:41 बजे से पहले ही अपनी खरीदारी संपन्न कर लें।

3. Significance of Akshaya Tritiya: क्यों है यह तिथि इतनी महत्वपूर्ण?

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, अक्षय तृतीया के दिन कई ऐतिहासिक और आध्यात्मिक घटनाएं घटित हुई थीं, जो इसे ‘युगादि तिथि’ बनाती हैं:

  1. त्रेता युग का आरंभ: इसी पावन दिन से त्रेता युग की शुरुआत हुई थी।
  2. परशुराम जयंती: भगवान विष्णु के छठे अवतार, श्री परशुराम जी का जन्म इसी दिन हुआ था।
  3. अक्षय पात्र की प्राप्ति: वनवास के दौरान पांडवों को इसी दिन भगवान कृष्ण से ‘अक्षय पात्र’ प्राप्त हुआ था, जिसमें कभी भोजन समाप्त नहीं होता था।
  4. गंगा अवतरण: माना जाता है कि इसी दिन मां गंगा का धरती पर अवतरण हुआ था।
  5. महाभारत लेखन: महर्षि वेदव्यास और भगवान गणेश ने इसी दिन महाभारत ग्रंथ का लेखन आरंभ किया था।

4. Pitru Tarpan on Akshaya Tritiya: पितरों के लिए विशेष उपाय

अक्षय तृतीया केवल धन प्राप्ति के लिए नहीं, बल्कि पितरों के आशीर्वाद के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। पितृ तर्पण की सरल विधि इस प्रकार है:

  • एक तांबे के लोटे में शुद्ध जल लेकर उसमें गंगाजल, काले तिल, तुलसी का पत्ता और कुशा डालें।
  • दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें और गीता के सातवें अध्याय का पाठ करें या श्रवण करें।
  • पाठ के बाद संकल्प लें कि इस पाठ का पुण्य फल आपके पितरों को प्राप्त हो।
  • पितृ तीर्थ (अंगूठे और तर्जनी उंगली के बीच का भाग) से जल अर्पित करें। इससे पितरों को अक्षय तृप्ति प्राप्त होती है।

5. What to Buy instead of Gold: सोना नहीं खरीद सकते तो क्या लाएं?

सोना और चांदी वर्तमान में काफी महंगे हैं। शास्त्र कहते हैं कि यदि सामर्थ्य न हो, तो केवल कुछ सस्ती वस्तुएं खरीदकर भी आप अक्षय पुण्य प्राप्त कर सकते हैं:

  • पीली सरसों: इसे लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है, थोड़ी सी पीली सरसों घर लाएं।
  • मिट्टी का घड़ा: वैशाख माह में जल से भरा मिट्टी का घड़ा दान करना या घर लाना बहुत शुभ है।
  • चने की दाल या हल्दी: ये दोनों वस्तुएं श्री हरि विष्णु और माता लक्ष्मी को अति प्रिय हैं।
  • पीतल की वस्तु: पीतल खरीदना भी स्वर्ण खरीदने के समान ही फलदायी माना जाता है।

6. Akshaya Tritiya Donation Benefits: दान की महिमा

इस दिन किया गया एक रुपये का दान भी अनंत गुना फल देता है। वैशाख के महीने में भीषण गर्मी होती है, इसलिए जल दान (प्याऊ लगाना), अन्न दान, पक्षियों के लिए दाना और गरीबों की सहायता करना आपको स्वर्ण दान के बराबर पुण्य दिलाता है।

Conclusion

Akshaya Tritiya 2026 का यह महापर्व आपके जीवन में खुशहाली और सुख-समृद्धि लेकर आए। 19 अप्रैल को श्रद्धा भाव से भगवान लक्ष्मी-नारायण की पूजा करें और अपनी शक्ति के अनुसार दान-पुण्य अवश्य करें। याद रहे, इस दिन किया गया कोई भी पाप कर्म भी ‘अक्षय’ हो जाता है, इसलिए मन, वचन और कर्म से शुद्ध रहें।

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